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रविवार, 25 जून 2023

“सफलता के रास्ते”


 “सफलता के रास्ते”

#DrVirenderMadhan,

~~हम चाहे तो अपने आत्म विश्वास और मेहनत के बल पर अपना भाग्य खुद लिख सकते हैं और अगर हमको अपना भाग्य लिखना नहीं आता तो परिस्थितियां हमारा भाग्य लिख देंगी ।

~~जीवन में आप चाहे जितनी अच्छी अच्छी किताबें पढ़ लो । कितने भी अच्छे शब्द सुनो ,लेकिन जब तक आप उनको अपने जीवन में नहीं अपनाएंगे तब तक उसका फायदा नहीं होगा ।

~~अगर आप तनाव  में है तो सारे दरवाजे बंद हो जाते हैं, बाहर का अंदर नहीं जाता, अंदर  का बाहर नहीं जाता । विचार प्रक्रिया में ठहराव आ जाता है वो अपने आप में एक बोझ बन जाता है ।

~~अगर हमने अपने सफलता के रास्ते में निराशा  हाथ लगती है इसका मतलब यह नहीं कि हम कोशिश करना छोड़ दें, क्योंकि हर निराशा और असफलता के पीछे सफलता छुपी होती है ।

~~प्यार करो जो आपके पास है आप जो चाहते हैं उसकी आवश्यकता है, जो आपको मिलता है उसे स्वीकार करें । 

~~दे दो जो तुम दे सकते हो, हमेशा याद रखें जैसा काम करोगे , वैसा ही फल मिलेगा ।

~~उन लोगों से दूर रहो जो आपकी महत्वाकांक्षाओं  को कम करने कोशिश करते हैं । छोटे लोग हमेशा ऐसा नहीं करते हैं लेकिन महान लोग आपको भी ऐसा महसूस कराते हैं । फिर आप भी तो अपने गुणों के कारण महान बन सकते हैं ।

~~हम सबमें ऐसी  ताकत है जो  हमें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित  कर सकती है या हमारे पंख काट कर आगे बढ़ने के अवसर देती है ।

~~भरोसा खुद पर रखो तो ताकत बन जाएगी और दूसरों पर रखोगे तो कमजोरी बन जाएगी ।

~~हाथ में है ,एक दिन आप के खिलाफ जिस दिन हक में हो गुरुर मत करना और जिस दिन खिलाफ हो थोड़ा सा सब्र कर लेना ।

~~स्वयं के जीवन में अगर हम दूसरों की सफलता को स्वीकार नहीं करते हैं तो वो ईर्ष्या जाती है और अगर स्वीकार कर ले तो वो प्रेरणा बन जाती है। 

~~जिंदगी में वही व्यक्ति असफल होते हैं जो   सोचते तो बहुत है मगर करते कुछ भी नहीं । 

~~अगर किसी की इज्जत नहीं करना चाहते तो मत कीजिए , लेकिन चार लोगों के साथ बैठकर किसी की बेइज्जती ना करें । 

~~जब छोटे थे तो झूठ बोलने से डर लगता था  बड़े हुए तो सच बोलने से डर लगता है ।  समय ने भी कितनी तरक्की कर ली है।

~~अमीर के जीवन में जो महत्व *सोने की चैन* का होता है गरीब के जीवन में वही महत्व *चैन से सोने* का होता है। 


धन्यवाद!

मंगलवार, 23 मई 2023

#सफलता के10 सूत्र

 #सफलता के10 सूत्र

#जीवन में सफलता पाने के लिए प्रेरणादायक विचार ,

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<सफलता के10 सूत्र>

सफलता एक अनुभवित कार्य है और इसे प्राप्त करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सूत्र होते हैं। यहां सफलता के 10 महत्वपूर्ण सूत्र हैं:

1- लक्ष्य निर्धारित करें:–

  सफलता के लिए, आपको पहले से ही स्पष्ट लक्ष्यों को निर्धारित करना चाहिए। आपके पास स्पष्ट और मापनीय लक्ष्य होने चाहिए जिनका आपको प्राप्त होना होता है।

2- संगठनशक्ति का उपयोग करें:–

 सफलता के लिए, आपको अपने समय, संसाधन और कौशल का संगठित रूप से उपयोग करना चाहिए। संगठनशक्ति आपको कार्यों को प्रभावी तरीके से संगठित करने और प्रगति करने में मदद करेगी।

3-निरंतरता बनाए रखें:–

 सफलता में निरंतरता बहुत महत्वपूर्ण है। आपको निरंतरता के साथ काम करना होगा, समय-समय पर मेहनत करनी होगी और कठिनाइयों का सामना करना होगा।

4–अवसरों का समय पर उपयोग करें:-

 सफलता के लिए, आपको अवसरों को पहचानना और समय पर उनका उपयोग करना चाहिए। अवसरों को आपकी प्रगति में मददगार बनाना चाहता है क्योंकि अवसर आपको नई संभावनाओं की ओर ले जाते हैं और आपको आगे बढ़ने का मौका देते हैं। सफलता के लिए, आपको अवसरों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

5- अपने क्षमताओं को विकसित करें:–

 सफलता के लिए, आपको नियमित रूप से अपनी क्षमताओं का विकास करना चाहिए। नए कौशल सीखें, ज्ञान में सुधार करें और अपने पूर्वानुभवों से सीखें। आपकी क्षमताओं का संचय आपकी सफलता को प्रभावित कर सकता है।


6-अवस्थान्तर को स्वीकार करें:–

 सफलता के लिए, आपको अपने अवस्थान्तरों को स्वीकार करना चाहिए। जीवन में कभी-कभी हार और असफलता का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन इसे अवस्थान्तर के रूप में देखें और इससे सीखें। अपने गलतियों से सीखने की क्षमता आपको आगे बढ़ने में मदद करेगी।

7- सहयोग और संबंध निर्माण करें:–

 सफलता के लिए, आपको सहयोग और संबंधों का महत्व समझना चाहिए। आपके आस-पास के लोग, परिवार, मित्र, और सहकर्मी आपकी सफलता में मददगार साबित हो सकते हैं। आपको सहयोगी मानसिकता विकसित करनी चाहिए और संबंधों को स्नेहपूर्ण, सहयोगी और आपसी समझदारी पर आधारित बनाना चाहिए।

8–अपने अवांछित क्षेत्र में अभिशासन करें:–

 सफलता के लिए, आपको अपने अवांछित क्षेत्र में अभिशासन करना चाहिए। अपनी प्रतिस्पर्धा की जांच करें, उन्हें पार करने के लिए आवश्यक कौशल और ज्ञान प्राप्त करें और उस क्षेत्र में उच्चतम स्तर पर अभिशासन करें।

9- संतुलन बनाए रखें:–

 सफलता के लिए, आपको संतुलन बनाए रखना चाहिए। आपको कार्य-परिवार के बीच संतुलन स्थापित करना होगा। स्वास्थ्य, परिवार, करियर, और व्यक्तिगत विकास के बीच संतुलन की साधना करनी चाहिए।

10- आत्मविश्वास और प्रेरणा बनाए रखें:–

 सफलता के लिए, आपको आत्मविश्वास और प्रेरणा की आवश्यकता होगी। आपको अपने कार्य में विश्वास रखना चाहिए और आपको स्वयं को प्रेरित करने वाले स्रोतों को ढूंढना चाहिए। सकारात्मक मान से संयोजन बनाए रखने के लिए, आपको आपके आस-पास के लोगों के साथ सकारात्मक वातावरण की स्थापना करनी चाहिए। आप सफलता की कहानियों को पढ़ें, प्रेरणादायक लोगों के साथ समय बिताएँ और अपने आप को सकारात्मक विचारों से प्रेरित करें।

** याद रखें, सफलता एक यात्रा है और इन सूत्रों का पालन करने के माध्यम से आप अपनी सफलता के पथ पर अग्रसर रह सकते हैं। हर किसी के लिए सफलता की परिभाषा अलग होती है, इसलिए अपनी खुद की परिभाषा के आधार पर लक्ष्य साधने का प्रयास करें और अपने स्वयं के मानवीय विकास को महत्व दें। जीवन के इस सफर में आपको उच्चतम स्तरों पर पहुंचने के लिए निरंतरता, संघर्ष, और समर्पण की आवश्यकता होगी। धैर्य रखें और निरंतर प्रयास करते रहें, तो सफलता अवश्य हाथ लेगी।

सफलता के 10 सूत्र:

*लक्ष्य निर्धारित करें।

*संगठनशक्ति का उपयोग करें।

*निरंतरता बनाए रखें।

*अवसरों का समय पर उपयोग करें।

*अपने क्षमताओं को विकसित करें।

*अवस्थान्तर को स्वीकार करें।

सहयोग और संबंध निर्माण करें।

*अपने अवांछित क्षेत्र में अभिशासन करें।

*संतुलन बनाए रखें।

*आत्मविश्वास और प्रेरणा बनाए रखें।

ये सूत्र सफलता की प्राप्ति में मार्गदर्शन करते हैं। सफलता के लिए, यह महत्वपूर्ण है कि हम अपने लक्ष्यों को स्पष्ट करें, अपनी क्षमताओं का विकास करें, संगठित रहें, निरंतर प्रयास करें, और सकारात्मक और सहानुभूतिपूर्ण संबंधों का ध्यान रखें। साथ ही, हमें अपने अवांछित क्षेत्र में अभिशासन करना चाहिए, संतुलन बनाए रखना चाहिए, आत्मविश्वास और प्रेरणा को धारण करना चाहिए। इन सूत्रों का पालन करके हम सफलता के मार्ग पर आगे बढ़ सकते हैं।

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रविवार, 7 मई 2023

पछतावा|Repentance>> Motivation story


 <<पछतावा|Repentance>>

Motivation story

– एक स्कूल के प्रिंसिपल वर्मा जी जैसे ही घर से स्कूल जाने के लिए निकले , तभी पीछे से उनके पिता ने आवाज लगाई- बेटा , मेरी आँख का ड्रॉप्स खत्म हो गया है, तीन दिन हो गए , तुम ऑफिस से लौटते समय ले आना।

–अपने पिता की ये बात सुन वर्मा जी गुस्सा होते हुए बोले-पापा, कितनी बार कहा है कि जाते समय पीछे से टोका मत करो, अपशगुन होता है।


–पिता बोले-बेटे, तुम इतने पढ़े लिखे होकर भी शगुन-अपशगुन को मानते हो?ठीक है, अब आगे से नही बोला करूँगा।


– वर्मा जी बिना कुछ बोले चल दिये।


–कुछ ही देर में वह एक  विशाल सभा कक्ष में जाकर मंच पर बैठ गए और वहां उपस्थित अधिकारी-कर्मचारियों के अभिवादन के बाद बोले- साथियों शासन के आदेशानुसार यह दो दिवसीय मीटिंग हो रही है, जिसमे हमें स्कूल चलो अभियान की ट्रेनिंग लेना है।


–तभी उनकी नज़र देर से मीटिंग में प्रवेश करते हुए एक शिक्षक मोहन शर्मा जी पर पड़ी, तो उन्हें देख चिल्लाकर बोले- मास्टर मोहन शर्मा ,यह कोई टाइम है मीटिंग में आने का? क्यों न इस अनुशासनहीनता के लिए आपका एक दिन का वेतन काटा जाए। आज आप लेट क्यों आये , इस बात का लिखित स्पस्टीकरण कल लेकर आना।


–मास्टर मोहन शर्मा जी बिना कुछ बोले सर झुकाए खड़े रहे,जब उन्होनें अपना सर सीधा किया , तब लोगों ने देखा कि उनकी आंखों में आंसू  थे।


– मीटिंग समाप्त होने पर प्रिंसिपल वर्मा जी ने अपने बड़े बाबू को बुलाकर एक दिन के वेतन काटने का आर्डर टाइप करने का आदेश दिया।


–उनका आदेश सुनकर बड़ा बाबू बोला-साहब जी,आप उनकी एक दिन का नही, एक महीने का वेतन भी रोकने का आदेश देंगे तो भी वह आपत्त्ति नही करेंगे।सिर झुकाकर आंसू बहाते रहेंगे। यह नौकरी उनकी कमजोरी भी है और मजबूरी भी है।


–प्रिंसिपल वर्मा जी बोले-

जो भी हो, अधिकारी लोग अक्सर दिमाग से काम लेते हैं, जो अधिकारी दिल से काम लेता है , वह अक्सर फेल हो जाता है।कल उनके एक दिन के वेतन काटने का आदेश  टाइप करके मेरे टेबल पर रख देना ।


–बड़े बाबू ने फिर कहा-

सर जी, एक-दो दिन रुक जाईये ,पहले जान लीजिए मामला क्या है ।


– तब प्रिंसिपल वर्मा बोले- देखिये बड़े बाबू, पेंडिंग काम एक लाश के समान होता है,जितनी देर करोगे उतनी ही सड़ांध होगी ,इसलिए काम हो जाना चाहिए जो मैंने कहा ।


–मीटिंग समाप्त होने बाद वर्मा जी अपने घर पहुंचे ,दरवाजे पर टकटकी लगाए उनके पिता बैठे थे।उनकी आंखें सवाल पूछ रही थीं कि आंखों का ड्रॉप्स लाए या नही लाए ?


–घर मे प्रवेश करते ही वर्मा जी ने अपनी पत्नी को आवाज़ लगाई औऱ उनके पास आने पर एक पेन ड्राइव देकर बोले- लीजिये तुम्हारी फरमाइश की नई फ़िल्म ।


वह बोलीं--

मैंने कब फरमाइस की थी जी ? चलो ले आये अच्छा किया, लेकिन आपके पापा तीन दिन से आंखों का ड्रॉप्स मांग रहे हैं, वह भी ले आते तो अच्छा होता ।

–वर्मा जी बोले-चलो,अब मूंड खराब मत करो। वो फ़िजूल की फरमाइश करते रहते हैं हमेशा ।चलो बैठकर साथ फ़िल्म देखें।

–अगले दिन वर्मा जी मीटिंग में जाने की तैयारी कर रहे थे कि तभी बड़े बाबू आ गए और मास्टर मोहन शर्मा के एक दिन के वेतन काटने के आदेश हस्ताक्षर हेतु उनके सामने रख दिया।

– वर्मा जी ने वह आदेश पढ़कर हस्ताक्षर कर के अपने पास रख लिया ।

 

–बड़े बाबू ने कहा- 

सर जी,अभी आप भी मीटिंग में जा रहे हैं, मुझे भी वही चलना है ,सर जी, आपकी शान के विरुध्द एक निवेदन है,अगर उचित समझें तो रास्ते मे मास्टर मोहन शर्मा जी का घर है,उनके पिता बहुत  बीमार हैं सिर्फ एक मिनिट उनको देखते हुए चलें? 

– वर्मा जी ने बहुत देर तक सोचने के बाद स्वीकृति दे दी, फिर क्या था, दोनों कुछ देर में ही शर्मा जी के घर पहुंच गए।

–मास्टर मोहन शर्मा अपने घर के बाहर अपने बीमार विकलांग पिता को स्नान करा रहे थे।

–अपने स्कूल के प्रिंसिपल को सामने पाकर शर्मा जी चौक पड़े औऱ हाथ जोड़कर बोले-

साहब जी,आप मेरे घर आये,मेरे अहोभाग्य, साहब जी, यह मेरे पिता जी हैं,इन्होंने  मजदूरी करके मुझे पाला है,इन्होंने पूरा जीवन मेरी परवरिश में लगा दिया।मुझे जवान करते-करते खुद बूढ़े हो गए। बिल्कुल आपके पिता के समान। आज यह बीमार हैं इसलिए मेरा भी फ़र्ज़ है कि इनकी सेवा करूँ। साहब जी , अब आप ही बताइए दुनियाँ की हर चीज खोने के बाद मिल सकती है, लेकिन अपने पिता को खो दिया तो फिर इनको सपने में भी पाना कठिन है। आप मेरा एक दिन का वेतन काट रहे हैं। मुझे जरा भी दुख नहीं है भले महीने भर का वेतन कट जाए, भूख लगेगी तो भीख मांग लूंगा,लेकिन अपने पिता की सेवा में जीवनभर कोई कमी नही कर सकता।

–यह सुनकर वर्मा जी ने वेतन काटने वाले आदेश को फाड़कर फेंक दिया, और मास्टर मोहन शर्मा के कांधे पर हाथ रखकर बोले-

शर्मा जी, आपकी पितृ-भक्ति के आगे मैं नममस्तक हूँ।

–फिर वर्मा जी मीटिंग में थोड़ी देर बैठे और उठकर वहां से सीधे अपने घर आ गए। वहां उन्होंने अपने पापा को इधर-उधर ढूंडा लेकिन वे नही मिले।

– तभी उनके पास किसी का मोबाइल कॉल आया-साहब जी, आपके पिता को कोई गाड़ी वाला टक्कर मार कर भाग गया, जल्दी आइए। वह अंतिम सांस गिन रहे है,


वर्मा जी तत्काल भागे, 


–उन्होंने देखा अस्पताल के जनरल वार्ड के बेड पर उनके पिता गम्भीर हालत में पड़े हुए हैं।

–वर्मा जी उनसे लिपट कर रो पड़े , और  बोले-

पापा जी, आप इस हाल में?


–लड़खड़ाती ज़ुबान में वह बोले-

बेटा, जब तुम्हारी माँ की मृत्यु हुई थी,तब तुम बहुत छोटे थे।लोगो मुझसे बहुत कहा कि दूसरी शादी कर लो। लेकिन मैंने अपना पूरा जीवन तुम्हें एक अच्छा इंसान बनाने में लगा दिया,लेकिन निश्चित ही मेरी परवरिश में कुछ कमी रह गई होगी ,अपनी आंख के इलाज के लिए मुझे अकेला अस्पताल आना पड़ा। अब मेरा अंतिम समय आ गया है,तुम्हें हमेशा खुश रहने का आशीर्वाद देता हूँ।

– तब वर्मा जी हाथ जोड़कर बोले-पापा जी,मुझे माफी मांगना नही आता, लेकिन मुझे इतना पता है। आपको माफ करना आता है।प्लीज मुझे माफ़ कर दो।

–लेकिन जिसे माफ करना था वह दुनियाँ छोड़कर जा चुका था।

–वर्मा जी बिलखकर रो पड़े। तभी वहां मास्टर मोहन शर्मा ने आकर रुमाल से उनके आंसू  पोंछते हुए कहा-

साहब जी,हम अपने असहाय बुजुर्गों को खोने के बाद उनके उपकारों को याद करके रोते हैं। अगर उनके जीवनकाल मे ही उनके उपकारों को याद करते रहें तो कभी बाद में रोना या पछताना न पड़े।

–मानव भूल जाता है कि उनका वर्तमान काल भी कभी न कभी भूतकाल होगा।हमारे धर्म शास्त्र सदियों पहले ही लिख चुके हैं- 

–पितृ देवो भवः। 

यह असत्य नही है, लेकिन हम पुराणों के साथ नही ,ज़माने के साथ चलते हैं।

मुझे एक फिल्म की चांद लाइन याद आ गई...

" आज उँगली थाम के तेरी तुझे मैं चलना सिखलाऊँ...

   कल हाथ पकड़ना मेरा जब मैं बूढ़ा हो  जाऊँ...”

शनिवार, 6 मई 2023

अपनी और दूसरों की मौत मे अंतर क्यों? अपनी और दूसरों की मौत मे अंतर क्यों?

 अपनी और दूसरों की मौत मे अंतर क्यों?



अपनी मृत्यु और अपनों की मृत्यु डरावनी लगती है। बाकी तो मौत को enjoy ही करता है आदमी ...


थोड़ा समय निकाल कर अंत तक पूरा पढ़ना 


 मौत के स्वाद का चटखारे लेता मनुष्य ...

थोड़ा कड़वा लिखा है पर मन का लिखा है ...


मौत से प्यार नहीं , मौत तो हमारा स्वाद है.....



बकरे का, 

गाय का,

भेंस का,

ऊँट का,

सुअर,

हिरण का,

तीतर का, 

मुर्गे का, 

हलाल का, 

बिना हलाल का, 

ताजा बकरे का, 

भुना हुआ,

छोटी मछली, 

बड़ी मछली, 


हल्की आंच पर सिका हुआ। न जाने कितने बल्कि अनगिनत स्वाद हैं मौत के।

क्योंकि मौत किसी और की, और स्वाद हमारा....


स्वाद से कारोबार बन गई मौत। 

मुर्गी पालन, मछली पालन, बकरी पालन, पोल्ट्री फार्म्स।

नाम *पालन* और मक़सद *हत्या*❗ 

स्लाटर हाउस तक खोल दिये। वो भी ऑफिशियल। गली गली में खुले नान वेज रेस्टॉरेंट, मौत का कारोबार नहीं तो और क्या हैं ? मौत से प्यार और उसका कारोबार इसलिए क्योंकि मौत हमारी नही है।


जो हमारी तरह बोल नही सकते, अभिव्यक्त नही कर सकते, अपनी सुरक्षा स्वयं करने में समर्थ नहीं हैं...


उनकी असहायता को हमने अपना बल कैसे मान लिया ?


 कैसे मान लिया कि उनमें भावनाएं नहीं होतीं ?

 या उनकी आहें नहीं निकलतीं ?


डाइनिंग टेबल पर हड्डियां नोचते बाप बच्चों को सीख देते है, बेटा कभी किसी का दिल नही दुखाना ! किसी की आहें मत लेना ! किसी की आंख में तुम्हारी वजह से आंसू नहीं आना चाहिए ! 


बच्चों में झुठे संस्कार डालते बाप को, अपने हाथ मे वो हडडी दिखाई नही देती, जो इससे पहले एक शरीर थी, जिसके अंदर इससे पहले एक आत्मा थी, उसकी भी एक मां थी ...??

जिसे काटा गया होगा ? 

जो कराहा होगा ? 

जो तड़पा होगा ? 

जिसकी आहें निकली होंगी ? 

जिसने बद्दुआ भी दी होगी ?


कैसे मान लिया कि जब जब  धरती पर अत्याचार बढ़ेंगे तो भगवान सिर्फ तुम इंसानों की रक्षा के लिए अवतार लेंगे  ..❓


क्या मूक जानवर उस परमपिता परमेश्वर की संतान नहीं हैं .❓


क्या उस ईश्वर को उनकी रक्षा की चिंता नहीं है  ..❓


धर्म की आड़ में उस परमपिता के नाम पर अपने स्वाद के लिए कभी ईद पर बकरे काटते हो, कभी दुर्गा मां या भैरव बाबा के सामने बकरे की बली चढ़ाते हो। कहीं तुम अपने स्वाद के लिए मछली का भोग लगाते हो । 


कभी सोचा ...!!!

क्या ईश्वर का स्वाद होता है ? ....क्या है उनका भोजन ?


किसे ठग रहे हो ?

भगवान को ? 

अल्लाह को ?  

जीसस को?

या खुद को ?


मंगलवार को नानवेज नही खाता ...!!!

आज शनिवार है इसलिए नहीं ...!!!

अभी रोज़े चल रहे हैं ....!!!

नवरात्रि में तो सवाल ही नही उठता ....!!!


झूठ पर झूठ....

...झूठ पर झूठ।।