“बचपन के पन्ने”कविता इन हिंदी.
“मढान”
पहले *भटूरे* को फुलाने के लिये
उसमें *ENO* डालिये
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फिर *भटूरे* से फूले पेट को
पिचकाने के लिये *ENO* पीजिये
****************?
*जीवन के कुछ गूढ़ रहस्य*
*आप कभी नहीं समझ पायेंगे*
*पांचवीं* तक *स्लेट* की बत्ती को *जीभ* से चाटकर ...
*कैल्शियम* की कमी पूरी करना हमारी स्थाई आदत थी
*लेकिन*
इसमें *पापबोध* भी था कि कहीं *विद्यामाता* नाराज न हो जायें ...!!!☺️
****
*पढ़ाई* के *तनाव* हमने
*पेन्सिल* का पिछला हिस्सा
चबाकर मिटाया था ...!!!😀
*पुस्तक* के बीच *पौधे की पत्ती*
और *मोरपंख* रखने से हम
*होशियार* हो जाएंगे ...
ऐसा हमारा *दृढ विश्वास* था. 😀
*कपड़े* के *थैले* में *किताब-कॉपियां*
जमाने का *विन्यास* हमारा
*रचनात्मक कौशल* था ...!!!☺️🙏🏻
हर साल जब नई *कक्षा* के *बस्ते बंधते*
तब *कॉपी किताबों* पर *जिल्द* चढ़ाना,
हमारे जीवन का *वार्षिक उत्सव* मानते थे ...!!!☺️
***
*माता - पिता* को हमारी *पढ़ाई* की कोई *फ़िक्र* नहीं थी, न हमारी *पढ़ाई*
उनकी *जेब* पर *बोझा* थी ...☺️💕
*सालों साल* बीत जाते पर *माता - पिता* के
*कदम* हमारे *स्कूल* में न पड़ते थे ...!!!😀
*****
एक *दोस्त* को *साईकिल* के बीच वाले *डंडे* पर और *दूसरे* को *पीछे कैरियर* पर *बिठा* कर
हमने कितने रास्ते *नापें* हैं,
यह अब याद नहीं बस कुछ
*धुंधली* सी *स्मृतियां* हैं ...!!!💕***
*स्कूल* में *पीटते* हुए और
*मुर्गा* बनते हमारा *ईगो*
हमें कभी *परेशान* नहीं करता था ..दरअसल हम जानते ही नही थे
कि, *ईगो* होता क्या है❓️💕
*पिटाई* हमारे *दैनिक जीवन* की ...
*सहज सामान्य प्रक्रिया* थी😰😀
*पीटने वाला* और *पिटने वाला* दोनो *खुश* थे,
*पिटने वाला* इसलिए कि हम *कम पिटे*
*पीटने वाला* इसलिए *खुश* होता था ..
कि *हाथ साफ़* हुवा ...!!!😀
***
हम अपने *माता - पिता* को कभी नहीं बता पाए
कि हम उन्हें कितना *प्यार* करते हैं, क्योंकि
हमें *"आई लव यू"* कहना आता ही नहीं था ...!!!
😰😀💕
आज हम *गिरते- सम्भलते*, *संघर्ष* करते दुनियां का हिस्सा बन चुके हैं,
कुछ *मंजिल* पा गये हैं तो
कुछ न जाने *कहां खो* गए हैं ...!!!😰
हम दुनिया में कहीं भी हों
लेकिन यह सच है,
हमे *हकीकतों* ने *पाला* है,
हम सच की दुनियां में थे ...!!!
😰
*कपड़ों* को *सिलवटों* से बचाए रखना और *रिश्तों* को *औपचारिकता* से बनाए रखना..
हमें कभी आया ही नहीं ...
इस मामले में हम सदा *मूर्ख* ही रहे ...!!!
😰
अपना अपना *प्रारब्ध* झेलते हुए
हम आज भी *ख्वाब* बुन रहे हैं,
शायद *ख्वाब बुनना* ही
हमें *जिन्दा* रखे है वरना
जो *जीवन* हम *जीकर* आये हैं
उसके सामने यह *वर्तमान* कुछ भी नहीं ...!!!
😰
हम *अच्छे* थे या *बुरे* थे
पर हम सब साथ थे *काश*
वो समय फिर लौट आए ...!!!
😰😰
"एक बार फिर अपने *बचपन* के *पन्नो*
को पलटिये, सच में फिर से जी उठेंगे”...💕
और अंत में ...
हमारे *पिताजी* के समय में *दादाजी* गाते थे ...
[*मेरा नाम करेगा रोशन*
*जग में मेरा राज दुलारा*💕]
***
हमारे *ज़माने* में हमने गाया ...
[*पापा कहते है बड़ा नाम करेगा*💕]
अब *हमारे बच्चे* गा रहे हैं …
*****
[*बापू सेहत के लिए ...*
*तू तो हानिकारक है*। ]
😰😰
*सही / वास्तव* में हम
*कहाँ से कहाँ* आ गए ...???😰
*एक बार मुड़ कर तो देखिये ...*😊🙏



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