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शुक्रवार, 19 मई 2023

मोटिवेशन क्या है कैसे काम करता है? #मोटिवेशन क्यों जरूरी है



#मोटिवेशन क्या है कैसे काम करता है?

#मोटिवेशन क्यों जरूरी है?

Dr.VirenderMadhan.

इस दुनिया में Successful होने के लिए Motivation सबसे पहली और जरुरी चीज है। बिना मोटिवेशन के आप सफलता की ओर पहला कदम (First Step to Success) भी नहीं रख सकते। इसलिए सक्सेस प्राप्त करने के लिए Motivated होना सबसे पहली शर्त है।

मोटिवेशन व्यक्ति की आंतरिक ऊर्जा को प्रेरित करने वाला एक बहुत महत्वपूर्ण अंश है। यह हमें उच्चतर स्तर पर काम करने, संघर्ष करने और सफलता की ओर प्रगति करने की सामर्थ्य प्रदान करता है। जब हम किसी कार्य के पीछे मोटिवेशन रखते हैं, तो हम अपार ऊर्जा, दृढ़ संकल्प और निरंतरता के साथ उसे पूरा करने के लिए प्रेरित होते हैं।


मोटिवेशन के बारे में अधिक समझने के लिए, हमें समझना चाहिए कि यह क्या होता है और इसे कैसे प्राप्त किया जा सकता है। मोटिवेशन का स्रोत अधिकांशतः आंतरिक होता है, जहां उसे बढ़ावा मिलता है और हमें कार्रवाई के लिए प्रेरित करता है। यह सामर्थ्य हमें उच्चतम स्तर की समस्याओं का सामना करने में मदद करता है और हमें अवसरों के साथ सामर्थ्यपूर्ण रूप से सामर्थ्य करने के लिए प्रेरित करता है।



मोटिवेशन का महत्वपूर्ण पहलू है स्वयं-विश्वास। जब हम मोटिवेशन से प्रेरित होते हैं, तो हमें अपने कार्य में विश्वास होता है और हम अपने कार्य को उच्चतम स्तर पर करने के लिए सक्षम महसूस करते हैं। स्वयं-विश्वास हमें विभिन्न चुनौतियों का सामना करने में मदद करता है और हमें उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। यह हमें अपनी क्षमताओं, प्रतिभाओं और संपूर्ण पोटेंशियल में विश्वास करने में मदद करता है।


दूसरा महत्वपूर्ण पहलू जो मोटिवेशन के साथ जुड़ा होता है, है लक्ष्य-स्थापना। एक चुनौतीपूर्ण कार्य में, लक्ष्य स्थापित करना बहुत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि यह हमें उस मंजिल तक पहुंचने की दिशा में निर्देशित करता है। यह लक्ष्य हमारी प्राथमिकताओं और अभिलाषाओं को प्रतिष्ठित करता है और हमें कार्य में लगाव बनाने में सहायता करता है। लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कार्रवाई उठाने की आवश्यकता होती है और यह मोटिवेशन को बढ़ावा देता है।


अतिरिक्त एक महत्वपूर्ण तत्व है अनुशासन। मोटिवेशन के साथ उन्नति करने के लिए हमें अपनी समय प्रबंधन, एनर्जी के साथ काम करने, अनुशासन बनाए रखना आवश्यक होता है। अनुशासन हमें नियमित रूप से कार्य करने, स्वयं को संगठित रखने और आवश्यकतानुसार समय का उपयोग करने में मदद करता है। यह हमें बाधाओं को पार करने और विभिन्न जीवन क्षेत्रों में सुधार करने के लिए आवश्यक संयम और समर्पण प्रदान करता है।


साथ ही, संगठनशीलता भी मोटिवेशन के लिए महत्वपूर्ण है। हमें अपने लक्ष्यों और कार्यों को स्पष्ट रूप से योजना बनानी चाहिए और उन्हें संगठित तरीके से प्राथमिकता देनी चाहिए। संगठनशीलता हमें आवश्यक संसाधनों का प्रबंधन करने में मदद करती है, समय का बेहतर उपयोग करने में सहायता करती है और एक मानव संसाधन के रूप में अपनी ऊर्जा को अधिकतम संभालने में मदद करती है।


आखिर में, परिवर्तनशीलता एक और महत्वपूर्ण तत्व है जो मोटिवेशन को बढ़ाता है। दुनिया तेजी से बदल रही है और हमें इसे स्वीकार करने और इसके साथ बदलने के

प्रतिस्पर्धात्मकता। हमें नए विचारों और तकनीकों का अध्ययन करने, नई क्षमताओं का विकास करने और उन्नति के लिए नए और सर्वोत्तम समाधानों का पता लगाने की जरूरत होती है। परिवर्तनशीलता वह गुण है जो हमें अपने कार्य में नयीता और नवीनता लाने के लिए प्रेरित करता है। इससे हम बोरियता और मौजूदा स्थितियों में सुखाने की जरूरत को दूर करते हैं और अपनी स्थिति में सुधार करने के लिए सक्रिय रूप से पहल करते हैं।


मोटिवेशन जीवन के हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण है, चाहे वह व्यक्तिगत उद्यमिता हो या व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य, या किसी भी अन्य क्षेत्र में। यदि हम स्वयं को मोटिवेटेड रखते हैं, तो हम समस्याओं को चुनौतियों में बदल सकते हैं और सफलता के मार्ग पर आगे बढ़ सकते हैं। मोटिवेशन हमारी सोच, व्यवहार और जीवनशैली को प्रभावित करता है और हमें उच्चतम स्तर की खुदरा प्रगति के लिए प्रेरित करता है।


इसलिए, हमें अपने आंतरिक मोटिवेशन को स्थायी और दृढ़ता से बनाए रखने की आवश्यकता होती है। कुछ महत्वपूर्ण तरीके जिनसे हम अपने मोटिवेशन को बढ़ा सकते हैं शामिल हैं:


लक्ष्य निर्धारण करें:-

 स्पष्ट और मापनीय लक्ष्यों को निर्धारित करना मोटिवेशन को बढ़ावा देता है। ये लक्ष्य आपके पास अच्छी तरह से व्यक्त करने चाहिए और आपके लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आपको प्रेरित करना चाहिए।


स्वयं संवाद::-

 अपने मन की आवाज़ को सुनें और अपने इंटरनल डायलॉग को सकारात्मक बनाए रखें। सकारात्मक आलोचना और स्वयं-समीक्षा के माध्यम से, आप अपनी क्षमताओं को पहचान सकते हैं और अपनी कमजोरियों का सामना कर सकते हैं।


समर्पण की ऊर्जा बढ़ाएं:-

 अपने कार्य में समर्पितता और प्रवृत्ति बढ़ाने के लिए अपनी ऊर्जा को सक्रिय रूप से बनाए रखें। अपने कार्य में पूर्णता का चेतना रखें और उसे पूरा करने के लिए संघर्ष करें।


प्रोत्साहन और बधाई का उपयोग करें:-

 स्वयं को प्रोत्साहित करने के लिए आप अपने आप को स्थायी प्रोत्साहन और बधाई दें। जब आप अपने काम में सफलता प्राप्त करते हैं, तो अपने आप को सराहें और उच्चतम सम्मान दें। इससे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा और आपका मोटिवेशन भी बढ़ेगा।


नियमित रूप से स्वास्थ्य देखभाल करें: -

अच्छे स्वास्थ्य का ध्यान रखना मोटिवेशन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। नियमित रूप से व्यायाम करें, स्वस्थ आहार लें और पर्याप्त नींद लें। एक स्वस्थ शरीर और मस्तिष्क आपको कार्य में प्रफुल्लित रखेगा और आपके मोटिवेशन को बढ़ाएगा।


संगठन और प्रबंधन कौशल को समेटें: –

अपने कार्य को अच्छी तरह से संगठित करें और समय प्रबंधन कौशल को सीखें। एक अच्छा योजना बनाएं और उसे पालन करें, जिससे आपका कार्य प्रभावी रूप से संपादित हो सके। यदि आप अपने कार्य को संगठित रखते हैं, तो आपका मोटिवेशन बना रहेगा।


संघर्ष का सामना करें: –

जीवन में चुनौतियां और संघर्ष हमेशा होते रहते हैं और इसलिए आपको इन चुनौतियों का सामना करना सीखना होगा। विफलता और असफलता से हार न मानें, बल्कि इन्हें एक मौका समझें जो आपको और मजबूत बनाने का अवसर प्रदान करता है। यदि आप चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहेंगे, तो आपका मोटिवेशन बना रहेगा और आप उन्हें पार कर सकेंगे।


संगठनात्मक कौशल को विकसित करें:-

 संगठनात्मक कौशल जैसे कि प्राथमिकताओं की निर्धारण, कार्य को बाँटना, समय प्रबंधन, निर्धारित मील के लिए अपनी प्रगति का मूल्यांकन आदि आपको कार्य को सुचारु रूप से प्रगति करने में मदद करेंगे। यदि आप अपनी क्षमताओं को संगठित तरीके से प्रशस्त करेंगे, तो आपका काम प्रभावी रूप से होगा और आपका मोटिवेशन भी बढ़ाएगा।


स्वतंत्रता और स्वाधीनता को महत्व दें:-

 स्वतंत्रता के बिना, मोटिवेशन का लंबित रहना मुश्किल हो सकता है। अपने कार्य में स्वतंत्रता को बढ़ावा दें,

Q:-मोटिवेशन को आसान शब्दों में क्या कहते हैं?

Ans:–अभिप्रेरणा एक व्यक्ति को निश्चित तरीके से कार्य करने के लिए प्रेरित करने और उत्तेजित करने की प्रक्रिया को संदर्भित करता है। एक संगठन के संदर्भ में, अभिप्रेरणा का तात्पर्य कर्मचारियों को अपनी क्षमताओं के अनुसार सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहित करना और आग्रह करना है ताकि संगठन के वांछित लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके।

,Q :-. खुद को मोटिवेशन कैसे दें?

Ans:–अपने पर ज्यादा जोर न डालें: हर किसी में कमियाँ होती हैं। अगर आप किसी हफ्ते अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर पायें, तो इसे सबक के तौर पर लीजिए। अपने अगले लक्ष्य को वक्त से पहले करने की कोशिश करें, ताकि बाकी वक्त में आप अपने बचे हुए काम को कर सकें। इस तरह से अगर आप कुछ पीछे रह गए हैं, तो भी शिड्यूल पर सही रहेंगे।

 Q:- Motivation कब तक काम करता है

Ans:- हमारी आवश्यकता या जरूरत (Need) के कारण ही मोटिवेशन उत्पन्न होता है। मोटिवेशन का हमेशा बने रहना हमारी आवश्यकता के प्रकार पर निर्भर करता है अगर हम अंदर से मोटिवेटेड हैं तो यह मोटिवेशन हमेशा रहेगा परंतु यदि हम सिर्फ बाहरी रूप से मोटिवेटेड है तो यह मोटिवेशन कुछ समय के बाद समाप्त हो जाएगा

धन्यवाद!

रविवार, 7 मई 2023

पछतावा|Repentance>> Motivation story


 <<पछतावा|Repentance>>

Motivation story

– एक स्कूल के प्रिंसिपल वर्मा जी जैसे ही घर से स्कूल जाने के लिए निकले , तभी पीछे से उनके पिता ने आवाज लगाई- बेटा , मेरी आँख का ड्रॉप्स खत्म हो गया है, तीन दिन हो गए , तुम ऑफिस से लौटते समय ले आना।

–अपने पिता की ये बात सुन वर्मा जी गुस्सा होते हुए बोले-पापा, कितनी बार कहा है कि जाते समय पीछे से टोका मत करो, अपशगुन होता है।


–पिता बोले-बेटे, तुम इतने पढ़े लिखे होकर भी शगुन-अपशगुन को मानते हो?ठीक है, अब आगे से नही बोला करूँगा।


– वर्मा जी बिना कुछ बोले चल दिये।


–कुछ ही देर में वह एक  विशाल सभा कक्ष में जाकर मंच पर बैठ गए और वहां उपस्थित अधिकारी-कर्मचारियों के अभिवादन के बाद बोले- साथियों शासन के आदेशानुसार यह दो दिवसीय मीटिंग हो रही है, जिसमे हमें स्कूल चलो अभियान की ट्रेनिंग लेना है।


–तभी उनकी नज़र देर से मीटिंग में प्रवेश करते हुए एक शिक्षक मोहन शर्मा जी पर पड़ी, तो उन्हें देख चिल्लाकर बोले- मास्टर मोहन शर्मा ,यह कोई टाइम है मीटिंग में आने का? क्यों न इस अनुशासनहीनता के लिए आपका एक दिन का वेतन काटा जाए। आज आप लेट क्यों आये , इस बात का लिखित स्पस्टीकरण कल लेकर आना।


–मास्टर मोहन शर्मा जी बिना कुछ बोले सर झुकाए खड़े रहे,जब उन्होनें अपना सर सीधा किया , तब लोगों ने देखा कि उनकी आंखों में आंसू  थे।


– मीटिंग समाप्त होने पर प्रिंसिपल वर्मा जी ने अपने बड़े बाबू को बुलाकर एक दिन के वेतन काटने का आर्डर टाइप करने का आदेश दिया।


–उनका आदेश सुनकर बड़ा बाबू बोला-साहब जी,आप उनकी एक दिन का नही, एक महीने का वेतन भी रोकने का आदेश देंगे तो भी वह आपत्त्ति नही करेंगे।सिर झुकाकर आंसू बहाते रहेंगे। यह नौकरी उनकी कमजोरी भी है और मजबूरी भी है।


–प्रिंसिपल वर्मा जी बोले-

जो भी हो, अधिकारी लोग अक्सर दिमाग से काम लेते हैं, जो अधिकारी दिल से काम लेता है , वह अक्सर फेल हो जाता है।कल उनके एक दिन के वेतन काटने का आदेश  टाइप करके मेरे टेबल पर रख देना ।


–बड़े बाबू ने फिर कहा-

सर जी, एक-दो दिन रुक जाईये ,पहले जान लीजिए मामला क्या है ।


– तब प्रिंसिपल वर्मा बोले- देखिये बड़े बाबू, पेंडिंग काम एक लाश के समान होता है,जितनी देर करोगे उतनी ही सड़ांध होगी ,इसलिए काम हो जाना चाहिए जो मैंने कहा ।


–मीटिंग समाप्त होने बाद वर्मा जी अपने घर पहुंचे ,दरवाजे पर टकटकी लगाए उनके पिता बैठे थे।उनकी आंखें सवाल पूछ रही थीं कि आंखों का ड्रॉप्स लाए या नही लाए ?


–घर मे प्रवेश करते ही वर्मा जी ने अपनी पत्नी को आवाज़ लगाई औऱ उनके पास आने पर एक पेन ड्राइव देकर बोले- लीजिये तुम्हारी फरमाइश की नई फ़िल्म ।


वह बोलीं--

मैंने कब फरमाइस की थी जी ? चलो ले आये अच्छा किया, लेकिन आपके पापा तीन दिन से आंखों का ड्रॉप्स मांग रहे हैं, वह भी ले आते तो अच्छा होता ।

–वर्मा जी बोले-चलो,अब मूंड खराब मत करो। वो फ़िजूल की फरमाइश करते रहते हैं हमेशा ।चलो बैठकर साथ फ़िल्म देखें।

–अगले दिन वर्मा जी मीटिंग में जाने की तैयारी कर रहे थे कि तभी बड़े बाबू आ गए और मास्टर मोहन शर्मा के एक दिन के वेतन काटने के आदेश हस्ताक्षर हेतु उनके सामने रख दिया।

– वर्मा जी ने वह आदेश पढ़कर हस्ताक्षर कर के अपने पास रख लिया ।

 

–बड़े बाबू ने कहा- 

सर जी,अभी आप भी मीटिंग में जा रहे हैं, मुझे भी वही चलना है ,सर जी, आपकी शान के विरुध्द एक निवेदन है,अगर उचित समझें तो रास्ते मे मास्टर मोहन शर्मा जी का घर है,उनके पिता बहुत  बीमार हैं सिर्फ एक मिनिट उनको देखते हुए चलें? 

– वर्मा जी ने बहुत देर तक सोचने के बाद स्वीकृति दे दी, फिर क्या था, दोनों कुछ देर में ही शर्मा जी के घर पहुंच गए।

–मास्टर मोहन शर्मा अपने घर के बाहर अपने बीमार विकलांग पिता को स्नान करा रहे थे।

–अपने स्कूल के प्रिंसिपल को सामने पाकर शर्मा जी चौक पड़े औऱ हाथ जोड़कर बोले-

साहब जी,आप मेरे घर आये,मेरे अहोभाग्य, साहब जी, यह मेरे पिता जी हैं,इन्होंने  मजदूरी करके मुझे पाला है,इन्होंने पूरा जीवन मेरी परवरिश में लगा दिया।मुझे जवान करते-करते खुद बूढ़े हो गए। बिल्कुल आपके पिता के समान। आज यह बीमार हैं इसलिए मेरा भी फ़र्ज़ है कि इनकी सेवा करूँ। साहब जी , अब आप ही बताइए दुनियाँ की हर चीज खोने के बाद मिल सकती है, लेकिन अपने पिता को खो दिया तो फिर इनको सपने में भी पाना कठिन है। आप मेरा एक दिन का वेतन काट रहे हैं। मुझे जरा भी दुख नहीं है भले महीने भर का वेतन कट जाए, भूख लगेगी तो भीख मांग लूंगा,लेकिन अपने पिता की सेवा में जीवनभर कोई कमी नही कर सकता।

–यह सुनकर वर्मा जी ने वेतन काटने वाले आदेश को फाड़कर फेंक दिया, और मास्टर मोहन शर्मा के कांधे पर हाथ रखकर बोले-

शर्मा जी, आपकी पितृ-भक्ति के आगे मैं नममस्तक हूँ।

–फिर वर्मा जी मीटिंग में थोड़ी देर बैठे और उठकर वहां से सीधे अपने घर आ गए। वहां उन्होंने अपने पापा को इधर-उधर ढूंडा लेकिन वे नही मिले।

– तभी उनके पास किसी का मोबाइल कॉल आया-साहब जी, आपके पिता को कोई गाड़ी वाला टक्कर मार कर भाग गया, जल्दी आइए। वह अंतिम सांस गिन रहे है,


वर्मा जी तत्काल भागे, 


–उन्होंने देखा अस्पताल के जनरल वार्ड के बेड पर उनके पिता गम्भीर हालत में पड़े हुए हैं।

–वर्मा जी उनसे लिपट कर रो पड़े , और  बोले-

पापा जी, आप इस हाल में?


–लड़खड़ाती ज़ुबान में वह बोले-

बेटा, जब तुम्हारी माँ की मृत्यु हुई थी,तब तुम बहुत छोटे थे।लोगो मुझसे बहुत कहा कि दूसरी शादी कर लो। लेकिन मैंने अपना पूरा जीवन तुम्हें एक अच्छा इंसान बनाने में लगा दिया,लेकिन निश्चित ही मेरी परवरिश में कुछ कमी रह गई होगी ,अपनी आंख के इलाज के लिए मुझे अकेला अस्पताल आना पड़ा। अब मेरा अंतिम समय आ गया है,तुम्हें हमेशा खुश रहने का आशीर्वाद देता हूँ।

– तब वर्मा जी हाथ जोड़कर बोले-पापा जी,मुझे माफी मांगना नही आता, लेकिन मुझे इतना पता है। आपको माफ करना आता है।प्लीज मुझे माफ़ कर दो।

–लेकिन जिसे माफ करना था वह दुनियाँ छोड़कर जा चुका था।

–वर्मा जी बिलखकर रो पड़े। तभी वहां मास्टर मोहन शर्मा ने आकर रुमाल से उनके आंसू  पोंछते हुए कहा-

साहब जी,हम अपने असहाय बुजुर्गों को खोने के बाद उनके उपकारों को याद करके रोते हैं। अगर उनके जीवनकाल मे ही उनके उपकारों को याद करते रहें तो कभी बाद में रोना या पछताना न पड़े।

–मानव भूल जाता है कि उनका वर्तमान काल भी कभी न कभी भूतकाल होगा।हमारे धर्म शास्त्र सदियों पहले ही लिख चुके हैं- 

–पितृ देवो भवः। 

यह असत्य नही है, लेकिन हम पुराणों के साथ नही ,ज़माने के साथ चलते हैं।

मुझे एक फिल्म की चांद लाइन याद आ गई...

" आज उँगली थाम के तेरी तुझे मैं चलना सिखलाऊँ...

   कल हाथ पकड़ना मेरा जब मैं बूढ़ा हो  जाऊँ...”