शनिवार, 15 जुलाई 2023

“बचपन के पन्ने”कविता इन हिंदी.

 “बचपन के पन्ने”कविता इन हिंदी.

“मढान”

पहले *भटूरे* को फुलाने के लिये 

उसमें *ENO* डालिये

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फिर *भटूरे* से फूले पेट को 

पिचकाने के लिये *ENO* पीजिये 

****************?

*जीवन के कुछ गूढ़ रहस्य*

*आप कभी नहीं समझ पायेंगे*

*पांचवीं* तक *स्लेट* की बत्ती को *जीभ* से चाटकर ...

*कैल्शियम* की कमी पूरी करना हमारी स्थाई आदत थी

*लेकिन*

इसमें *पापबोध* भी था कि कहीं  *विद्यामाता* नाराज न हो जायें ...!!!☺️

****

*पढ़ाई* के *तनाव* हमने 

*पेन्सिल* का पिछला हिस्सा 

चबाकर मिटाया था ...!!!😀

*पुस्तक* के बीच *पौधे की पत्ती* 

और *मोरपंख* रखने से हम 

*होशियार* हो जाएंगे ...

ऐसा हमारा *दृढ विश्वास* था. 😀


*कपड़े* के *थैले* में *किताब-कॉपियां*

जमाने का *विन्यास* हमारा 

*रचनात्मक कौशल* था ...!!!☺️🙏🏻


हर साल जब नई *कक्षा* के *बस्ते बंधते*

तब *कॉपी किताबों* पर *जिल्द* चढ़ाना,

हमारे जीवन का *वार्षिक उत्सव* मानते थे ...!!!☺️

***

*माता - पिता* को हमारी *पढ़ाई* की कोई *फ़िक्र* नहीं थी, न हमारी *पढ़ाई* 

उनकी *जेब* पर *बोझा* थी ...☺️💕

*सालों साल* बीत जाते पर *माता - पिता* के 

*कदम* हमारे *स्कूल* में न पड़ते थे ...!!!😀

*****

एक *दोस्त* को *साईकिल* के बीच वाले *डंडे* पर और *दूसरे* को *पीछे कैरियर* पर *बिठा* कर 

हमने कितने रास्ते *नापें* हैं, 

यह अब याद नहीं बस कुछ 

*धुंधली* सी *स्मृतियां* हैं ...!!!💕***


*स्कूल* में *पीटते* हुए और 

*मुर्गा* बनते हमारा *ईगो* 

हमें कभी *परेशान* नहीं करता था ..दरअसल हम जानते ही नही थे 

कि, *ईगो* होता क्या है❓️💕

*पिटाई* हमारे *दैनिक जीवन* की ...

*सहज सामान्य प्रक्रिया* थी😰😀

*पीटने वाला* और *पिटने वाला* दोनो *खुश* थे,

*पिटने वाला* इसलिए कि हम *कम पिटे*

*पीटने वाला* इसलिए *खुश* होता था ..

कि *हाथ साफ़* हुवा ...!!!😀

***

हम अपने *माता - पिता* को कभी नहीं बता पाए 

कि हम उन्हें कितना *प्यार* करते हैं, क्योंकि 

हमें *"आई लव यू"* कहना आता ही नहीं था ...!!!

😰😀💕

आज हम *गिरते- सम्भलते*, *संघर्ष*  करते दुनियां का हिस्सा बन चुके हैं, 

कुछ *मंजिल* पा गये हैं तो 

कुछ न जाने *कहां खो* गए हैं ...!!!😰


हम दुनिया में कहीं भी हों 

लेकिन यह सच है, 

हमे *हकीकतों* ने *पाला* है, 

हम सच की दुनियां में थे ...!!!

😰

*कपड़ों* को *सिलवटों* से बचाए रखना और *रिश्तों* को *औपचारिकता* से बनाए रखना..

 हमें कभी आया ही नहीं ...

इस मामले में हम सदा *मूर्ख* ही रहे ...!!!

😰

अपना अपना *प्रारब्ध* झेलते हुए 

हम आज भी *ख्वाब* बुन रहे हैं, 

शायद *ख्वाब बुनना* ही 

हमें *जिन्दा* रखे है वरना 

जो *जीवन* हम *जीकर* आये हैं 

उसके सामने यह *वर्तमान* कुछ भी नहीं ...!!!

😰

हम *अच्छे* थे या *बुरे* थे 

पर हम सब साथ थे *काश* 

वो समय फिर लौट आए ...!!!

😰😰

"एक बार फिर अपने *बचपन* के *पन्नो* 

को पलटिये, सच में फिर से जी उठेंगे”...💕

  

और अंत में ...


हमारे *पिताजी* के समय में *दादाजी* गाते थे ...


[*मेरा नाम करेगा रोशन*

*जग में मेरा राज दुलारा*💕]

***

हमारे *ज़माने* में हमने गाया ...


[*पापा कहते है बड़ा नाम करेगा*💕]



अब *हमारे बच्चे* गा रहे हैं …

*****

[*बापू सेहत के लिए ...*

*तू तो हानिकारक है*। ]

😰😰


*सही / वास्तव* में हम 

*कहाँ से कहाँ* आ गए ...???😰


*एक बार मुड़ कर तो देखिये ...*😊🙏

रविवार, 25 जून 2023

“सफलता के रास्ते”


 “सफलता के रास्ते”

#DrVirenderMadhan,

~~हम चाहे तो अपने आत्म विश्वास और मेहनत के बल पर अपना भाग्य खुद लिख सकते हैं और अगर हमको अपना भाग्य लिखना नहीं आता तो परिस्थितियां हमारा भाग्य लिख देंगी ।

~~जीवन में आप चाहे जितनी अच्छी अच्छी किताबें पढ़ लो । कितने भी अच्छे शब्द सुनो ,लेकिन जब तक आप उनको अपने जीवन में नहीं अपनाएंगे तब तक उसका फायदा नहीं होगा ।

~~अगर आप तनाव  में है तो सारे दरवाजे बंद हो जाते हैं, बाहर का अंदर नहीं जाता, अंदर  का बाहर नहीं जाता । विचार प्रक्रिया में ठहराव आ जाता है वो अपने आप में एक बोझ बन जाता है ।

~~अगर हमने अपने सफलता के रास्ते में निराशा  हाथ लगती है इसका मतलब यह नहीं कि हम कोशिश करना छोड़ दें, क्योंकि हर निराशा और असफलता के पीछे सफलता छुपी होती है ।

~~प्यार करो जो आपके पास है आप जो चाहते हैं उसकी आवश्यकता है, जो आपको मिलता है उसे स्वीकार करें । 

~~दे दो जो तुम दे सकते हो, हमेशा याद रखें जैसा काम करोगे , वैसा ही फल मिलेगा ।

~~उन लोगों से दूर रहो जो आपकी महत्वाकांक्षाओं  को कम करने कोशिश करते हैं । छोटे लोग हमेशा ऐसा नहीं करते हैं लेकिन महान लोग आपको भी ऐसा महसूस कराते हैं । फिर आप भी तो अपने गुणों के कारण महान बन सकते हैं ।

~~हम सबमें ऐसी  ताकत है जो  हमें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित  कर सकती है या हमारे पंख काट कर आगे बढ़ने के अवसर देती है ।

~~भरोसा खुद पर रखो तो ताकत बन जाएगी और दूसरों पर रखोगे तो कमजोरी बन जाएगी ।

~~हाथ में है ,एक दिन आप के खिलाफ जिस दिन हक में हो गुरुर मत करना और जिस दिन खिलाफ हो थोड़ा सा सब्र कर लेना ।

~~स्वयं के जीवन में अगर हम दूसरों की सफलता को स्वीकार नहीं करते हैं तो वो ईर्ष्या जाती है और अगर स्वीकार कर ले तो वो प्रेरणा बन जाती है। 

~~जिंदगी में वही व्यक्ति असफल होते हैं जो   सोचते तो बहुत है मगर करते कुछ भी नहीं । 

~~अगर किसी की इज्जत नहीं करना चाहते तो मत कीजिए , लेकिन चार लोगों के साथ बैठकर किसी की बेइज्जती ना करें । 

~~जब छोटे थे तो झूठ बोलने से डर लगता था  बड़े हुए तो सच बोलने से डर लगता है ।  समय ने भी कितनी तरक्की कर ली है।

~~अमीर के जीवन में जो महत्व *सोने की चैन* का होता है गरीब के जीवन में वही महत्व *चैन से सोने* का होता है। 


धन्यवाद!

बुधवार, 31 मई 2023

हनुमान चालीसा का क्या अर्थ है?

 हनुमान चालीसा का क्या अर्थ है?

मै अल्पज्ञ हूँ किसी जगह पढा सो आज आपको प्रस्तुत कर रहा हुँ ...आप भी इसे आगे किसी जिज्ञासु के लिये भेज दें..

जय श्री हनुमान, जय श्री राम,

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हम सब हनुमान चालीसा पढते हैं, सब रटा रटाया।

– क्या हमे चालीसा पढते समय पता भी होता है कि हम हनुमानजी से क्या कह रहे हैं या क्या मांग रहे हैं?

     बस रटा रटाया बोलते जाते हैं। आनंद और फल शायद तभी मिलेगा जब हमें इसका मतलब भी पता हो।

तो लीजिए पेश है 

{श्री हनुमान चालीसा अर्थ सहित!!}

ओम् श्री हनुमनतःनमः


“श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुरु सुधारि।

बरनऊँ रघुवर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।”

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📯《अर्थ》→ गुरु महाराज के चरण.कमलों की धूलि से अपने मन रुपी दर्पण को पवित्र करके श्री रघुवीर के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो चारों फल धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को देने वाला हे।

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“बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरो पवन कुमार।

बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार।”

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📯《अर्थ》→ हे पवन कुमार! मैं आपको सुमिरन.करता हूँ। आप तो जानते ही हैं, कि मेरा शरीर और बुद्धि निर्बल है। मुझे शारीरिक बल, सदबुद्धि एवं ज्ञान दीजिए और मेरे दुःखों व दोषों का नाश कर दीजिए।

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“जय हनुमान ज्ञान गुण सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥1॥”

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📯《अर्थ 》→ श्री हनुमान जी! आपकी जय हो। आपका ज्ञान और गुण अथाह है। हे कपीश्वर! आपकी जय हो! तीनों लोकों,स्वर्ग लोक, भूलोक और पाताल लोक में आपकी कीर्ति है।

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“राम दूत अतुलित बलधामा, अंजनी पुत्र पवन सुत नामा॥2॥”

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📯《अर्थ》→ हे पवनसुत अंजनी नंदन! आपके समान दूसरा बलवान नही है।

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“महावीर विक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी॥3॥”

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📯《अर्थ》→ हे महावीर बजरंग बली! आप विशेष पराक्रम वाले है। आप खराब बुद्धि को दूर करते है, और अच्छी बुद्धि वालो के साथी, सहायक है।

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“कंचन बरन बिराज सुबेसा, कानन कुण्डल कुंचित केसा॥4॥”

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📯《अर्थ》→ आप सुनहले रंग, सुन्दर वस्त्रों, कानों में कुण्डल और घुंघराले बालों से सुशोभित हैं।★

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“हाथ ब्रज और ध्वजा विराजे, काँधे मूँज जनेऊ साजै॥5॥”

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📯《अर्थ》→ आपके हाथ मे बज्र और ध्वजा है और कन्धे पर मूंज के जनेऊ की शोभा है।

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“शंकर सुवन केसरी नंदन, तेज प्रताप महा जग वंदन॥6॥”

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📯《अर्थ 》→ हे शंकर के अवतार! हे केसरी नंदन! आपके पराक्रम और महान यश की संसार भर मे वन्दना होती है।

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“विद्यावान गुणी अति चातुर, राम काज करिबे को आतुर॥7॥”

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📯《अर्थ 》→ आप प्रकान्ड विद्या निधान है, गुणवान और अत्यन्त कार्य कुशल होकर श्री राम काज करने के लिए आतुर रहते है।

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“प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया, राम लखन सीता मन बसिया॥8॥”

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📯《अर्थ 》→ आप श्री राम चरित सुनने मे आनन्द रस लेते है। श्री राम, सीता और लखन आपके हृदय मे बसे रहते है।

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“सूक्ष्म रुप धरि सियहिं दिखावा, बिकट रुप धरि लंक जरावा॥9॥”

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📯《अर्थ》→ आपने अपना बहुत छोटा रुप धारण करके सीता जी को दिखलाया और भयंकर रूप करके.लंका को जलाया।

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“भीम रुप धरि असुर संहारे, रामचन्द्र के काज संवारे॥10॥”

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📯《अर्थ 》→ आपने विकराल रुप धारण करके.राक्षसों को मारा और श्री रामचन्द्र जी के उदेश्यों को सफल कराया।

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“लाय सजीवन लखन जियाये, श्री रघुवीर हरषि उर लाये॥11॥”

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📯《अर्थ 》→ आपने संजीवनी बुटी लाकर लक्ष्मणजी को जिलाया जिससे श्री रघुवीर ने हर्षित होकर आपको हृदय से लगा लिया।

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“रघुपति कीन्हीं बहुत बड़ाई, तुम मम प्रिय भरत सम भाई॥12॥”

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📯《अर्थ 》→ श्री रामचन्द्र ने आपकी बहुत प्रशंसा की और कहा की तुम मेरे भरत जैसे प्यारे भाई हो।

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“सहस बदन तुम्हरो जस गावैं, अस कहि श्री पति कंठ लगावैं॥13॥”

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📯《अर्थ 》→ श्री राम ने आपको यह कहकर हृदय से.लगा लिया की तुम्हारा यश हजार मुख से सराहनीय है।

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“सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा, नारद,सारद सहित अहीसा॥14॥”

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📯《अर्थ》→श्री सनक, श्री सनातन, श्री सनन्दन, श्री सनत्कुमार आदि मुनि ब्रह्मा आदि देवता नारद जी, सरस्वती जी, शेषनाग जी सब आपका गुण गान करते है।

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“जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते, कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥15॥”

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📯《अर्थ 》→ यमराज,कुबेर आदि सब दिशाओं के रक्षक, कवि विद्वान, पंडित या कोई भी आपके यश का पूर्णतः वर्णन नहीं कर सकते।

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“तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा, राम मिलाय राजपद दीन्हा॥16॥”

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📯《अर्थ 》→ आपनें सुग्रीव जी को श्रीराम से मिलाकर उपकार किया, जिसके कारण वे राजा बने।

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“तुम्हरो मंत्र विभीषण माना, लंकेस्वर भए सब जग जाना ॥17॥”

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📯《अर्थ 》→ आपके उपदेश का विभिषण जी ने पालन किया जिससे वे लंका के राजा बने, इसको सब संसार जानता है।

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“जुग सहस्त्र जोजन पर भानू, लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥18॥”

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📯《अर्थ 》→ जो सूर्य इतने योजन दूरी पर है की उस पर पहुँचने के लिए हजार युग लगे। दो हजार योजन की दूरी पर स्थित सूर्य को आपने एक मीठा फल समझ कर निगल लिया।

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“प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहि, जलधि लांघि गये अचरज नाहीं॥19॥”

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📯《अर्थ 》→ आपने श्री रामचन्द्र जी की अंगूठी मुँह मे रखकर समुद्र को लांघ लिया, इसमें कोई आश्चर्य नही है।

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“दुर्गम काज जगत के जेते, सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥20॥”

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📯《अर्थ 》→ संसार मे जितने भी कठिन से कठिन काम हो, वो आपकी कृपा से सहज हो जाते है।

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“राम दुआरे तुम रखवारे, होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥21॥”

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📯《अर्थ 》→ श्री रामचन्द्र जी के द्वार के आप.रखवाले है, जिसमे आपकी आज्ञा बिना किसी को प्रवेश नही मिलता अर्थात आपकी प्रसन्नता के बिना राम कृपा दुर्लभ है।

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“सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहू.को डरना॥22॥”

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📯《अर्थ 》→ जो भी आपकी शरण मे आते है, उस सभी को आन्नद प्राप्त होता है, और जब आप रक्षक. है, तो फिर किसी का डर नही रहता।

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“आपन तेज सम्हारो आपै, तीनों लोक हाँक ते काँपै॥23॥”

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📯《अर्थ. 》→ आपके सिवाय आपके वेग को कोई नही रोक सकता, आपकी गर्जना से तीनों लोक काँप जाते है।

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“भूत पिशाच निकट नहिं आवै, महावीर जब नाम सुनावै॥24॥”

📯《अर्थ 》→ जहाँ महावीर हनुमान जी का नाम सुनाया जाता है, वहाँ भूत, पिशाच पास भी नही फटक सकते।

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“नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा॥25॥”

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📯《अर्थ 》→ वीर हनुमान जी! आपका निरंतर जप करने से सब रोग चले जाते है,और सब पीड़ा मिट जाती है।

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“संकट तें हनुमान छुड़ावै, मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥26॥”

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📯《अर्थ 》→ हे हनुमान जी! विचार करने मे, कर्म करने मे और बोलने मे, जिनका ध्यान आपमे रहता है, उनको सब संकटो से आप छुड़ाते है।

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“सब पर राम तपस्वी राजा, तिनके काज सकल तुम साजा॥ 27॥”

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📯《अर्थ 》→ तपस्वी राजा श्री रामचन्द्र जी सबसे श्रेष्ठ है, उनके सब कार्यो को आपने सहज मे कर दिया।

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“और मनोरथ जो कोइ लावै, सोई अमित जीवन फल पावै॥28॥”

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📯《अर्थ 》→ जिस पर आपकी कृपा हो, वह कोई भी अभिलाषा करे तो उसे ऐसा फल मिलता है जिसकी जीवन मे कोई सीमा नही होती।

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“चारों जुग परताप तुम्हारा, है परसिद्ध जगत उजियारा॥29॥”

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📯《अर्थ 》→ चारो युगों सतयुग, त्रेता, द्वापर तथा कलियुग मे आपका यश फैला हुआ है, जगत मे आपकी कीर्ति सर्वत्र प्रकाशमान है।

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“साधु सन्त के तुम रखवारे, असुर निकंदन राम दुलारे॥30॥

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📯《अर्थ 》→ हे श्री राम के दुलारे ! आप.सज्जनों की रक्षा करते है और दुष्टों का नाश करते है।

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“अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता॥३१॥”

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📯《अर्थ 》→ आपको माता श्री जानकी से ऐसा वरदान मिला हुआ है, जिससे आप किसी को भी आठों सिद्धियां और नौ निधियां दे सकते है।

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आठ सिद्धियां:–

1.) अणिमा → जिससे साधक किसी को दिखाई नही पड़ता और कठिन से कठिन पदार्थ मे प्रवेश कर.जाता है।★

2.) महिमा → जिसमे योगी अपने को बहुत बड़ा बना देता है।★

3.) गरिमा → जिससे साधक अपने को चाहे जितना भारी बना लेता है।★

4.) लघिमा → जिससे जितना चाहे उतना हल्का बन जाता है।★

5.) प्राप्ति → जिससे इच्छित पदार्थ की प्राप्ति होती है।★

6.) प्राकाम्य → जिससे इच्छा करने पर वह पृथ्वी मे समा सकता है, आकाश मे उड़ सकता है।★

7.) ईशित्व → जिससे सब पर शासन का सामर्थय हो जाता है।★

8.)वशित्व → जिससे दूसरो को वश मे किया जाता है।★

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“राम रसायन तुम्हरे पासा, सदा रहो रघुपति के दासा॥32॥”

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📯《अर्थ 》→ आप निरंतर श्री रघुनाथ जी की शरण मे रहते है, जिससे आपके पास बुढ़ापा और असाध्य रोगों के नाश के लिए राम नाम औषधि है।

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“तुम्हरे भजन राम को पावै, जनम जनम के दुख बिसरावै॥33॥“

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📯《अर्थ 》→ आपका भजन करने से श्री राम.जी प्राप्त होते है, और जन्म जन्मांतर के दुःख दूर होते है।

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“अन्त काल रघुबर पुर जाई, जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई॥34॥”

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📯《अर्थ 》→ अंत समय श्री रघुनाथ जी के धाम को जाते है और यदि फिर भी जन्म लेंगे तो भक्ति करेंगे और श्री राम भक्त कहलायेंगे।

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“और देवता चित न धरई, हनुमत सेई सर्व सुख करई॥35॥”

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📯《अर्थ 》→ हे हनुमान जी! आपकी सेवा करने से सब प्रकार के सुख मिलते है, फिर अन्य किसी देवता की आवश्यकता नही रहती।

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“संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥36॥”

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📯《अर्थ 》→ हे वीर हनुमान जी! जो आपका सुमिरन करता रहता है, उसके सब संकट कट जाते है और सब पीड़ा मिट जाती है।

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“जय जय जय हनुमान गोसाईं, कृपा करहु गुरु देव की नाई॥37॥"

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📯《अर्थ 》→ हे स्वामी हनुमान जी! आपकी जय हो, जय हो, जय हो! आप मुझपर कृपालु श्री गुरु जी के समान कृपा कीजिए।

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“जो सत बार पाठ कर कोई, छुटहि बँदि महा सुख होई॥38॥”

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📯《अर्थ 》→ जो कोई इस हनुमान चालीसा का सौ बार पाठ करेगा वह सब बन्धनों से छुट जायेगा और उसे परमानन्द मिलेगा।

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“जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा, होय सिद्धि साखी गौरीसा॥39॥“

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📯《अर्थ 》→ भगवान शंकर ने यह हनुमान चालीसा लिखवाया, इसलिए वे साक्षी है कि जो इसे पढ़ेगा उसे निश्चय ही सफलता प्राप्त होगी।

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“तुलसीदास सदा हरि चेरा, कीजै नाथ हृदय मँह डेरा॥40॥”

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📯《अर्थ 》→ हे नाथ हनुमान जी! तुलसीदास सदा ही श्री राम का दास है।इसलिए आप उसके हृदय मे निवास कीजिए।

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“पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रुप।

राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥”

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📯《अर्थ 》→ हे संकट मोचन पवन कुमार! आप आनन्द मंगलो के स्वरुप है। हे देवराज! आप श्री राम, सीता जी और लक्ष्मण सहित मेरे हृदय मे निवास कीजिए।★

ॐश्री हनुमन्तःनमः

🌹सीता राम दुत हनुमान जी को समर्पित🌹

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🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏

कृपया आगे भी औरौं को भेजें🙏

धन्यवाद!

मंगलवार, 23 मई 2023

#सफलता के10 सूत्र

 #सफलता के10 सूत्र

#जीवन में सफलता पाने के लिए प्रेरणादायक विचार ,

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<सफलता के10 सूत्र>

सफलता एक अनुभवित कार्य है और इसे प्राप्त करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सूत्र होते हैं। यहां सफलता के 10 महत्वपूर्ण सूत्र हैं:

1- लक्ष्य निर्धारित करें:–

  सफलता के लिए, आपको पहले से ही स्पष्ट लक्ष्यों को निर्धारित करना चाहिए। आपके पास स्पष्ट और मापनीय लक्ष्य होने चाहिए जिनका आपको प्राप्त होना होता है।

2- संगठनशक्ति का उपयोग करें:–

 सफलता के लिए, आपको अपने समय, संसाधन और कौशल का संगठित रूप से उपयोग करना चाहिए। संगठनशक्ति आपको कार्यों को प्रभावी तरीके से संगठित करने और प्रगति करने में मदद करेगी।

3-निरंतरता बनाए रखें:–

 सफलता में निरंतरता बहुत महत्वपूर्ण है। आपको निरंतरता के साथ काम करना होगा, समय-समय पर मेहनत करनी होगी और कठिनाइयों का सामना करना होगा।

4–अवसरों का समय पर उपयोग करें:-

 सफलता के लिए, आपको अवसरों को पहचानना और समय पर उनका उपयोग करना चाहिए। अवसरों को आपकी प्रगति में मददगार बनाना चाहता है क्योंकि अवसर आपको नई संभावनाओं की ओर ले जाते हैं और आपको आगे बढ़ने का मौका देते हैं। सफलता के लिए, आपको अवसरों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

5- अपने क्षमताओं को विकसित करें:–

 सफलता के लिए, आपको नियमित रूप से अपनी क्षमताओं का विकास करना चाहिए। नए कौशल सीखें, ज्ञान में सुधार करें और अपने पूर्वानुभवों से सीखें। आपकी क्षमताओं का संचय आपकी सफलता को प्रभावित कर सकता है।


6-अवस्थान्तर को स्वीकार करें:–

 सफलता के लिए, आपको अपने अवस्थान्तरों को स्वीकार करना चाहिए। जीवन में कभी-कभी हार और असफलता का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन इसे अवस्थान्तर के रूप में देखें और इससे सीखें। अपने गलतियों से सीखने की क्षमता आपको आगे बढ़ने में मदद करेगी।

7- सहयोग और संबंध निर्माण करें:–

 सफलता के लिए, आपको सहयोग और संबंधों का महत्व समझना चाहिए। आपके आस-पास के लोग, परिवार, मित्र, और सहकर्मी आपकी सफलता में मददगार साबित हो सकते हैं। आपको सहयोगी मानसिकता विकसित करनी चाहिए और संबंधों को स्नेहपूर्ण, सहयोगी और आपसी समझदारी पर आधारित बनाना चाहिए।

8–अपने अवांछित क्षेत्र में अभिशासन करें:–

 सफलता के लिए, आपको अपने अवांछित क्षेत्र में अभिशासन करना चाहिए। अपनी प्रतिस्पर्धा की जांच करें, उन्हें पार करने के लिए आवश्यक कौशल और ज्ञान प्राप्त करें और उस क्षेत्र में उच्चतम स्तर पर अभिशासन करें।

9- संतुलन बनाए रखें:–

 सफलता के लिए, आपको संतुलन बनाए रखना चाहिए। आपको कार्य-परिवार के बीच संतुलन स्थापित करना होगा। स्वास्थ्य, परिवार, करियर, और व्यक्तिगत विकास के बीच संतुलन की साधना करनी चाहिए।

10- आत्मविश्वास और प्रेरणा बनाए रखें:–

 सफलता के लिए, आपको आत्मविश्वास और प्रेरणा की आवश्यकता होगी। आपको अपने कार्य में विश्वास रखना चाहिए और आपको स्वयं को प्रेरित करने वाले स्रोतों को ढूंढना चाहिए। सकारात्मक मान से संयोजन बनाए रखने के लिए, आपको आपके आस-पास के लोगों के साथ सकारात्मक वातावरण की स्थापना करनी चाहिए। आप सफलता की कहानियों को पढ़ें, प्रेरणादायक लोगों के साथ समय बिताएँ और अपने आप को सकारात्मक विचारों से प्रेरित करें।

** याद रखें, सफलता एक यात्रा है और इन सूत्रों का पालन करने के माध्यम से आप अपनी सफलता के पथ पर अग्रसर रह सकते हैं। हर किसी के लिए सफलता की परिभाषा अलग होती है, इसलिए अपनी खुद की परिभाषा के आधार पर लक्ष्य साधने का प्रयास करें और अपने स्वयं के मानवीय विकास को महत्व दें। जीवन के इस सफर में आपको उच्चतम स्तरों पर पहुंचने के लिए निरंतरता, संघर्ष, और समर्पण की आवश्यकता होगी। धैर्य रखें और निरंतर प्रयास करते रहें, तो सफलता अवश्य हाथ लेगी।

सफलता के 10 सूत्र:

*लक्ष्य निर्धारित करें।

*संगठनशक्ति का उपयोग करें।

*निरंतरता बनाए रखें।

*अवसरों का समय पर उपयोग करें।

*अपने क्षमताओं को विकसित करें।

*अवस्थान्तर को स्वीकार करें।

सहयोग और संबंध निर्माण करें।

*अपने अवांछित क्षेत्र में अभिशासन करें।

*संतुलन बनाए रखें।

*आत्मविश्वास और प्रेरणा बनाए रखें।

ये सूत्र सफलता की प्राप्ति में मार्गदर्शन करते हैं। सफलता के लिए, यह महत्वपूर्ण है कि हम अपने लक्ष्यों को स्पष्ट करें, अपनी क्षमताओं का विकास करें, संगठित रहें, निरंतर प्रयास करें, और सकारात्मक और सहानुभूतिपूर्ण संबंधों का ध्यान रखें। साथ ही, हमें अपने अवांछित क्षेत्र में अभिशासन करना चाहिए, संतुलन बनाए रखना चाहिए, आत्मविश्वास और प्रेरणा को धारण करना चाहिए। इन सूत्रों का पालन करके हम सफलता के मार्ग पर आगे बढ़ सकते हैं।

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शनिवार, 20 मई 2023

कर्ज_वाली_लक्ष्मी” एक शिक्षाप्रद कहानी


 #कर्ज_वाली_लक्ष्मी”

एक शिक्षाप्रद कहानी

अभी कुछ पहले की बात है,

एक 15 साल का भाई अपने पापा से कहा–

 "पापा पापा दीदी के होने वाले ससुर और सास कल आ रहे है" अभी जीजाजी ने फोन पर बताया।


दीदी मतलब उसकी बड़ी बहन की सगाई कुछ दिन पहले एक अच्छे घर में तय हुई थी।


दीनदयाल जी पहले से ही उदास बैठे थे धीरे से बोले–

हां बेटा.. उनका कल ही फोन आया था कि वो एक दो दिन में #दहेज की  बात करने आ रहे हैं.. बोले... #_दहेज के बारे में आप से ज़रूरी बात करनी है.. ”

दीनदयाल जी सहमे हुए थे


बड़ी मुश्किल से यह अच्छा लड़का मिला था.. कल को उनकी दहेज की मांग इतनी ज़्यादा हो कि मैं पूरी नही कर पाया तो ?" 


कहते कहते उनकी आँखें भर आयीं.


घर के प्रत्येक सदस्य के मन व चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही थी...लड़की भी उदास हो गयी.

........ 


अगले दिन समधी समधिन आए.. उनकी खूब आवभगत की गयी.


कुछ देर बैठने के बाद लड़के के पिता ने लड़की के पिता से कहा–" दीनदयाल जी अब काम की बात हो जाए.”


दीनदयाल जी की धड़कन बढ़ गयी.. बोले.–“ हां हां.. समधी जी.. जो आप हुकुम करें."


लड़के के पिताजी ने धीरे से अपनी कुर्सी दीनदयाल जी और खिसकाई ओर धीरे से उनके कान में बोले–

“दीनदयाल जी मुझे *दहेज* के बारे बात करनी है!”


दीनदयाल जी हाथ जोड़ते हुये आँखों में पानी लिए हुए बोले–

“बताईए समधी जी....जो आप को उचित लगे.. मैं पूरी कोशिश करूंगा.”


समधी जी ने धीरे से दीनदयाल जी का हाथ अपने हाथों से दबाते हुये बस इतना ही कहा–

“आप कन्यादान में कुछ भी देगें या ना भी देंगे... थोड़ा देंगे या ज़्यादा देंगे.. मुझे सब स्वीकार है... पर कर्ज लेकर आप एक रुपया भी दहेज मत देना.. वो मुझे स्वीकार नहीं.”

क्योकि जो बेटी अपने बाप को कर्ज में डुबो दे वैसी "कर्ज वाली लक्ष्मी" मुझे स्वीकार नही”


मुझे बिना कर्ज वाली बहू ही चाहिए.. जो मेरे यहाँ आकर मेरी सम्पति को दो गुना कर देगी.. 

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दीनदयाल जी हैरान हो गए.. उनसे गले मिलकर बोले.–“समधी जी बिल्कुल ऐसा ही होगा”

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शिक्षा-

  कर्ज वाली लक्ष्मी ना कोई विदा करें न ही कोई स्वीकार करे.. 


यह कहानी मेरी नही है, मैं यह भी नहीं जानता की यह किसने और कब लिखी है l मुझे अच्छी लगी तो मैने इसे समाज के साथ साझा करना अपना दायित्व समझा.   आपको पसंद आये तो सारी दुआए उनके लिए ही होंगी जिन्होंने यह दिल से कागज पर उतारी है I

धन्यवाद!

 🙏🙏

शुक्रवार, 19 मई 2023

मोटिवेशन क्या है कैसे काम करता है? #मोटिवेशन क्यों जरूरी है



#मोटिवेशन क्या है कैसे काम करता है?

#मोटिवेशन क्यों जरूरी है?

Dr.VirenderMadhan.

इस दुनिया में Successful होने के लिए Motivation सबसे पहली और जरुरी चीज है। बिना मोटिवेशन के आप सफलता की ओर पहला कदम (First Step to Success) भी नहीं रख सकते। इसलिए सक्सेस प्राप्त करने के लिए Motivated होना सबसे पहली शर्त है।

मोटिवेशन व्यक्ति की आंतरिक ऊर्जा को प्रेरित करने वाला एक बहुत महत्वपूर्ण अंश है। यह हमें उच्चतर स्तर पर काम करने, संघर्ष करने और सफलता की ओर प्रगति करने की सामर्थ्य प्रदान करता है। जब हम किसी कार्य के पीछे मोटिवेशन रखते हैं, तो हम अपार ऊर्जा, दृढ़ संकल्प और निरंतरता के साथ उसे पूरा करने के लिए प्रेरित होते हैं।


मोटिवेशन के बारे में अधिक समझने के लिए, हमें समझना चाहिए कि यह क्या होता है और इसे कैसे प्राप्त किया जा सकता है। मोटिवेशन का स्रोत अधिकांशतः आंतरिक होता है, जहां उसे बढ़ावा मिलता है और हमें कार्रवाई के लिए प्रेरित करता है। यह सामर्थ्य हमें उच्चतम स्तर की समस्याओं का सामना करने में मदद करता है और हमें अवसरों के साथ सामर्थ्यपूर्ण रूप से सामर्थ्य करने के लिए प्रेरित करता है।



मोटिवेशन का महत्वपूर्ण पहलू है स्वयं-विश्वास। जब हम मोटिवेशन से प्रेरित होते हैं, तो हमें अपने कार्य में विश्वास होता है और हम अपने कार्य को उच्चतम स्तर पर करने के लिए सक्षम महसूस करते हैं। स्वयं-विश्वास हमें विभिन्न चुनौतियों का सामना करने में मदद करता है और हमें उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। यह हमें अपनी क्षमताओं, प्रतिभाओं और संपूर्ण पोटेंशियल में विश्वास करने में मदद करता है।


दूसरा महत्वपूर्ण पहलू जो मोटिवेशन के साथ जुड़ा होता है, है लक्ष्य-स्थापना। एक चुनौतीपूर्ण कार्य में, लक्ष्य स्थापित करना बहुत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि यह हमें उस मंजिल तक पहुंचने की दिशा में निर्देशित करता है। यह लक्ष्य हमारी प्राथमिकताओं और अभिलाषाओं को प्रतिष्ठित करता है और हमें कार्य में लगाव बनाने में सहायता करता है। लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कार्रवाई उठाने की आवश्यकता होती है और यह मोटिवेशन को बढ़ावा देता है।


अतिरिक्त एक महत्वपूर्ण तत्व है अनुशासन। मोटिवेशन के साथ उन्नति करने के लिए हमें अपनी समय प्रबंधन, एनर्जी के साथ काम करने, अनुशासन बनाए रखना आवश्यक होता है। अनुशासन हमें नियमित रूप से कार्य करने, स्वयं को संगठित रखने और आवश्यकतानुसार समय का उपयोग करने में मदद करता है। यह हमें बाधाओं को पार करने और विभिन्न जीवन क्षेत्रों में सुधार करने के लिए आवश्यक संयम और समर्पण प्रदान करता है।


साथ ही, संगठनशीलता भी मोटिवेशन के लिए महत्वपूर्ण है। हमें अपने लक्ष्यों और कार्यों को स्पष्ट रूप से योजना बनानी चाहिए और उन्हें संगठित तरीके से प्राथमिकता देनी चाहिए। संगठनशीलता हमें आवश्यक संसाधनों का प्रबंधन करने में मदद करती है, समय का बेहतर उपयोग करने में सहायता करती है और एक मानव संसाधन के रूप में अपनी ऊर्जा को अधिकतम संभालने में मदद करती है।


आखिर में, परिवर्तनशीलता एक और महत्वपूर्ण तत्व है जो मोटिवेशन को बढ़ाता है। दुनिया तेजी से बदल रही है और हमें इसे स्वीकार करने और इसके साथ बदलने के

प्रतिस्पर्धात्मकता। हमें नए विचारों और तकनीकों का अध्ययन करने, नई क्षमताओं का विकास करने और उन्नति के लिए नए और सर्वोत्तम समाधानों का पता लगाने की जरूरत होती है। परिवर्तनशीलता वह गुण है जो हमें अपने कार्य में नयीता और नवीनता लाने के लिए प्रेरित करता है। इससे हम बोरियता और मौजूदा स्थितियों में सुखाने की जरूरत को दूर करते हैं और अपनी स्थिति में सुधार करने के लिए सक्रिय रूप से पहल करते हैं।


मोटिवेशन जीवन के हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण है, चाहे वह व्यक्तिगत उद्यमिता हो या व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य, या किसी भी अन्य क्षेत्र में। यदि हम स्वयं को मोटिवेटेड रखते हैं, तो हम समस्याओं को चुनौतियों में बदल सकते हैं और सफलता के मार्ग पर आगे बढ़ सकते हैं। मोटिवेशन हमारी सोच, व्यवहार और जीवनशैली को प्रभावित करता है और हमें उच्चतम स्तर की खुदरा प्रगति के लिए प्रेरित करता है।


इसलिए, हमें अपने आंतरिक मोटिवेशन को स्थायी और दृढ़ता से बनाए रखने की आवश्यकता होती है। कुछ महत्वपूर्ण तरीके जिनसे हम अपने मोटिवेशन को बढ़ा सकते हैं शामिल हैं:


लक्ष्य निर्धारण करें:-

 स्पष्ट और मापनीय लक्ष्यों को निर्धारित करना मोटिवेशन को बढ़ावा देता है। ये लक्ष्य आपके पास अच्छी तरह से व्यक्त करने चाहिए और आपके लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आपको प्रेरित करना चाहिए।


स्वयं संवाद::-

 अपने मन की आवाज़ को सुनें और अपने इंटरनल डायलॉग को सकारात्मक बनाए रखें। सकारात्मक आलोचना और स्वयं-समीक्षा के माध्यम से, आप अपनी क्षमताओं को पहचान सकते हैं और अपनी कमजोरियों का सामना कर सकते हैं।


समर्पण की ऊर्जा बढ़ाएं:-

 अपने कार्य में समर्पितता और प्रवृत्ति बढ़ाने के लिए अपनी ऊर्जा को सक्रिय रूप से बनाए रखें। अपने कार्य में पूर्णता का चेतना रखें और उसे पूरा करने के लिए संघर्ष करें।


प्रोत्साहन और बधाई का उपयोग करें:-

 स्वयं को प्रोत्साहित करने के लिए आप अपने आप को स्थायी प्रोत्साहन और बधाई दें। जब आप अपने काम में सफलता प्राप्त करते हैं, तो अपने आप को सराहें और उच्चतम सम्मान दें। इससे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा और आपका मोटिवेशन भी बढ़ेगा।


नियमित रूप से स्वास्थ्य देखभाल करें: -

अच्छे स्वास्थ्य का ध्यान रखना मोटिवेशन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। नियमित रूप से व्यायाम करें, स्वस्थ आहार लें और पर्याप्त नींद लें। एक स्वस्थ शरीर और मस्तिष्क आपको कार्य में प्रफुल्लित रखेगा और आपके मोटिवेशन को बढ़ाएगा।


संगठन और प्रबंधन कौशल को समेटें: –

अपने कार्य को अच्छी तरह से संगठित करें और समय प्रबंधन कौशल को सीखें। एक अच्छा योजना बनाएं और उसे पालन करें, जिससे आपका कार्य प्रभावी रूप से संपादित हो सके। यदि आप अपने कार्य को संगठित रखते हैं, तो आपका मोटिवेशन बना रहेगा।


संघर्ष का सामना करें: –

जीवन में चुनौतियां और संघर्ष हमेशा होते रहते हैं और इसलिए आपको इन चुनौतियों का सामना करना सीखना होगा। विफलता और असफलता से हार न मानें, बल्कि इन्हें एक मौका समझें जो आपको और मजबूत बनाने का अवसर प्रदान करता है। यदि आप चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहेंगे, तो आपका मोटिवेशन बना रहेगा और आप उन्हें पार कर सकेंगे।


संगठनात्मक कौशल को विकसित करें:-

 संगठनात्मक कौशल जैसे कि प्राथमिकताओं की निर्धारण, कार्य को बाँटना, समय प्रबंधन, निर्धारित मील के लिए अपनी प्रगति का मूल्यांकन आदि आपको कार्य को सुचारु रूप से प्रगति करने में मदद करेंगे। यदि आप अपनी क्षमताओं को संगठित तरीके से प्रशस्त करेंगे, तो आपका काम प्रभावी रूप से होगा और आपका मोटिवेशन भी बढ़ाएगा।


स्वतंत्रता और स्वाधीनता को महत्व दें:-

 स्वतंत्रता के बिना, मोटिवेशन का लंबित रहना मुश्किल हो सकता है। अपने कार्य में स्वतंत्रता को बढ़ावा दें,

Q:-मोटिवेशन को आसान शब्दों में क्या कहते हैं?

Ans:–अभिप्रेरणा एक व्यक्ति को निश्चित तरीके से कार्य करने के लिए प्रेरित करने और उत्तेजित करने की प्रक्रिया को संदर्भित करता है। एक संगठन के संदर्भ में, अभिप्रेरणा का तात्पर्य कर्मचारियों को अपनी क्षमताओं के अनुसार सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहित करना और आग्रह करना है ताकि संगठन के वांछित लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके।

,Q :-. खुद को मोटिवेशन कैसे दें?

Ans:–अपने पर ज्यादा जोर न डालें: हर किसी में कमियाँ होती हैं। अगर आप किसी हफ्ते अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर पायें, तो इसे सबक के तौर पर लीजिए। अपने अगले लक्ष्य को वक्त से पहले करने की कोशिश करें, ताकि बाकी वक्त में आप अपने बचे हुए काम को कर सकें। इस तरह से अगर आप कुछ पीछे रह गए हैं, तो भी शिड्यूल पर सही रहेंगे।

 Q:- Motivation कब तक काम करता है

Ans:- हमारी आवश्यकता या जरूरत (Need) के कारण ही मोटिवेशन उत्पन्न होता है। मोटिवेशन का हमेशा बने रहना हमारी आवश्यकता के प्रकार पर निर्भर करता है अगर हम अंदर से मोटिवेटेड हैं तो यह मोटिवेशन हमेशा रहेगा परंतु यदि हम सिर्फ बाहरी रूप से मोटिवेटेड है तो यह मोटिवेशन कुछ समय के बाद समाप्त हो जाएगा

धन्यवाद!

मंगलवार, 16 मई 2023

कहीं ना फिर देर हो जाये

 

(चित्र गुगल से)

<कहीं ना फिर देर हो जाये>

पति पत्नी की एक सच्ची घटना पर आधारित आंख खोल देने वाली कहानी “कहीं देर न हो जाये”

रिस्ता तोडने से पहले एक बार ये कहानी पढ ले

 शायद आपकी आंखों से पर्दा हट जायें,

हरियाणा के एक शहर की दुखद घटना 😌😔

[कोर्ट से बाहर निकलने का दृश्य–]

राधिका और नवीन को आज तलाक के कागज मिल गए थे। दोनो साथ ही कोर्ट से बाहर निकले। दोनो के परिजन साथ थे और उनके चेहरे पर विजय और सुकून के निशान साफ झलक रहे थे। चार साल की लंबी लड़ाई के बाद आज फैसला हो गया था।

दस साल हो गए थे शादी को मग़र साथ मे छः साल ही रह पाए थे। 

चार साल तो तलाक की कार्यवाही में लग गए।

राधिका के हाथ मे दहेज के समान की लिस्ट थी जो अभी नवीन के घर से लेना था और नवीन के हाथ मे गहनों की लिस्ट थी जो राधिका से लेने थे।

[साथ मे कोर्ट का यह आदेश भी था कि नवीन  दस लाख रुपये की राशि एकमुश्त राधिका को चुकाएगा।]

राधिका और नवीन दोनो एक ही टेम्पो में बैठकर नवीन के घर पहुंचे।  दहेज में दिए समान की निशानदेही राधिका को करनी थी।

इसलिए चार वर्ष बाद ससुराल जा रही थी। आखरी बार बस उसके बाद कभी नही आना था उधर।


सभी परिजन अपने अपने घर जा चुके थे। बस तीन प्राणी बचे थे।नवीन, राधिका और राधिका की माता जी।


नवीन घर मे अकेला ही रहता था।  मां-बाप और भाई आज भी गांव में ही रहते हैं। 


राधिका और नवीन का इकलौता बेटा जो अभी सात वर्ष का है कोर्ट के फैसले के अनुसार बालिग होने तक वह राधिका के पास ही रहेगा। नवीन महीने में एक बार उससे मिल सकता है।

घर मे परिवेश करते ही पुरानी यादें ताज़ी हो गई। कितनी मेहनत से सजाया था इसको राधिका ने। एक एक चीज में उसकी जान बसी थी। सब कुछ उसकी आँखों के सामने बना था।एक एक ईंट से  धीरे धीरे बनते घरोंदे को पूरा होते देखा था उसने।

सपनो का घर था उसका। कितनी शिद्दत से नवीन ने उसके सपने को पूरा किया था।

नवीन थकाहारा सा सोफे पर पसर गया। बोला "ले लो जो कुछ भी चाहिए मैं तुझे नही रोकूंगा"

राधिका ने अब गौर से नवीन को देखा। चार साल में कितना बदल गया है। बालों में सफेदी झांकने लगी है। शरीर पहले से आधा रह गया है। चार साल में चेहरे की रौनक गायब हो गई।


वह स्टोर रूम की तरफ बढ़ी जहाँ उसके दहेज का अधिकतर  समान पड़ा था। सामान ओल्ड फैशन का था इसलिए कबाड़ की तरह स्टोर रूम में डाल दिया था। मिला भी कितना था उसको दहेज। प्रेम विवाह था दोनो का। घर वाले तो मजबूरी में साथ हुए थे। 

प्रेम विवाह था तभी तो नजर लग गई किसी की। क्योंकि प्रेमी जोड़ी को हर कोई टूटता हुआ देखना चाहता है। 

बस एक बार पीकर बहक गया था नवीन। हाथ उठा बैठा था उसपर। बस वो गुस्से में मायके चली गई थी। 

फिर चला था लगाने सिखाने का दौर । इधर नवीन के भाई भाभी और उधर राधिका की माँ। नोबत कोर्ट तक जा पहुंची और तलाक हो गया।


न राधिका लोटी और न नवीन लाने गया। 


राधिका की माँ बोली" कहाँ है तेरा सामान? इधर तो नही दिखता। बेच दिया होगा इस शराबी ने ?"


"चुप रहो माँ" 

राधिका को न जाने क्यों नवीन को उसके मुँह पर शराबी कहना अच्छा नही लगा।


फिर स्टोर रूम में पड़े सामान को एक एक कर लिस्ट में मिलाया गया। 

बाकी कमरों से भी लिस्ट का सामान उठा लिया गया।

राधिका ने सिर्फ अपना सामान लिया नवीन के समान को छुवा भी नही।  फिर राधिका ने नवीन को गहनों से भरा बैग पकड़ा दिया। 

नवीन ने बैग वापस राधिका को दे दिया " रखलो, मुझे नही चाहिए काम आएगें तेरे मुसीबत में ।"


गहनों की किम्मत 15 लाख से कम नही थी। 

"क्यूँ, कोर्ट में तो तुम्हरा वकील कितनी दफा गहने-गहने चिल्ला रहा था" 

"कोर्ट की बात कोर्ट में खत्म हो गई, राधिका। वहाँ तो मुझे भी दुनिया का सबसे बुरा जानवर और शराबी साबित किया गया है।"

सुनकर राधिका की माँ ने नाक भों चढ़ाई।


"नही चाहिए। 

वो दस लाख भी नही चाहिए"


 "क्यूँ?" कहकर नवीन सोफे से खड़ा हो गया।


"बस यूँ ही" राधिका ने मुँह फेर लिया।


"इतनी बड़ी जिंदगी पड़ी है कैसे काटोगी? ले जाओ,,, काम आएगें।"


इतना कह कर नवीन ने भी मुंह फेर लिया और दूसरे कमरे में चला गया। शायद आंखों में कुछ उमड़ा होगा जिसे छुपाना भी जरूरी था।


राधिका की माता जी गाड़ी वाले को फोन करने में व्यस्त थी।


राधिका को मौका मिल गया। वो नवीन के पीछे उस कमरे में चली गई।


वो रो रहा था। अजीब सा मुँह बना कर।  जैसे भीतर के सैलाब को दबाने दबाने की जद्दोजहद कर रहा हो। राधिका ने उसे कभी रोते हुए नही देखा था। आज पहली बार देखा न जाने क्यों दिल को कुछ सुकून सा मिला।


मग़र ज्यादा भावुक नही हुई।

सधे अंदाज में बोली "इतनी फिक्र थी तो क्यों दिया तलाक?"

"मैंने नही तलाक तुमने दिया" 

"दस्तखत तो तुमने भी किए"

"माफी नही माँग सकते थे?"

"मौका कब दिया तुम्हारे घर वालों ने। जब भी फोन किया काट दिया।"

"घर भी आ सकते थे"?

"हिम्मत नही थी?"

राधिका की माँ आ गई। वो उसका हाथ पकड़ कर बाहर ले गई। "अब क्यों मुँह लग रही है इसके? अब तो रिश्ता भी खत्म हो गया"

मां-बेटी बाहर बरामदे में सोफे पर बैठकर गाड़ी का इंतजार करने लगी। 

राधिका के भीतर भी कुछ टूट रहा था। दिल बैठा जा रहा था। वो सुन्न सी पड़ती जा रही थी। जिस सोफे पर बैठी थी उसे गौर से देखने लगी। कैसे कैसे बचत कर के उसने और नवीन ने वो सोफा खरीदा था। पूरे शहर में घूमी तब यह पसन्द आया था।"

 

फिर उसकी नजर सामने तुलसी के सूखे पौधे पर गई। कितनी शिद्दत से देखभाल किया करती थी। उसके साथ तुलसी भी घर छोड़ गई।


घबराहट और बढ़ी तो वह फिर से उठ कर भीतर चली गई। माँ ने पीछे से पुकारा मग़र उसने अनसुना कर दिया। नवीन बेड पर उल्टे मुंह पड़ा था। एक बार तो उसे दया आई उस पर। मग़र  वह जानती थी कि अब तो सब कुछ खत्म हो चुका है इसलिए उसे भावुक नही होना है। 


उसने सरसरी नजर से कमरे को देखा। अस्त व्यस्त हो गया है पूरा कमरा। कहीं कंही तो मकड़ी के जाले झूल रहे हैं।


कितनी नफरत थी उसे मकड़ी के जालों से?



फिर उसकी नजर चारों और लगी उन फोटो पर गई जिनमे वो नवीन से लिपट कर मुस्करा रही थी।

कितने सुनहरे दिन थे वो।


इतने में माँ फिर आ गई। हाथ पकड़ कर फिर उसे बाहर ले गई।


बाहर गाड़ी आ गई थी। सामान गाड़ी में डाला जा रहा था। राधिका सुन सी बैठी थी। नवीन गाड़ी की आवाज सुनकर बाहर आ गया। 

अचानक नवीन कान पकड़ कर घुटनो के बल बैठ गया।

बोला--" मत जाओ,,, माफ कर दो"

शायद यही वो शब्द थे जिन्हें सुनने के लिए चार साल से तड़प रही थी। सब्र के सारे बांध एक साथ टूट गए। राधिका ने कोर्ट के फैसले का कागज निकाला और फाड़ दिया । 


और मां कुछ कहती उससे पहले ही लिपट गई नवीन से। साथ मे दोनो बुरी तरह रोते जा रहे थे।

दूर खड़ी राधिका की माँ समझ गई कि 

कोर्ट का आदेश दिलों के सामने कागज से ज्यादा कुछ नही।

काश उनको पहले मिलने दिया होता?

 अगर माफी मांगने से ही रिश्ते टूटने से बच जाए, तो माफ़ी मांग लेनी चाहिए.